प्रकाशिक विकिरण मानक

1. अनुभाग के उद्देश्य:

प्रकाशीय विकिरणमिति अनुभाग में वैद्युत-चुम्बकीय वर्णक्रम (electromagnetic spectrum) में उपस्थित एक छोटा सा हिस्सा जिसे हम प्रकाश क्षेत्र (optical region) कहते है, व जिसका तरंगदैर्ध्य λ = 200 nm से 2500 nm तक है, का मापन किया जाता है । इस हिस्से का एक छोटा भाग जिसे हम दृश्य प्रकाश (light) कहते हैं तथा जिसका तरंगदैर्ध्य λ = 380 nm से 780 nm तक होता है ,का विशेष रूप से न्यूनतम अनिश्चितता के साथ मापन किया जाता है । प्रकाशीय विकिरण मापन का क्षेत्र बहुत व्यापक है, इसके अंतर्गत ऑप्टो-इलेक्ट्रॉनिक्स (opto-electronics), दूरसंचार, प्रकाश विविधता, अन्तरिक्ष, सुरक्षा एवम स्वास्थ्य से जुड़े व्यवसाय व व्यावसायिक प्रतिष्ठान सम्मलित है । चूँकि इन क्षेत्रों में गुणवत्ता की प्राथमिकता विशेष महत्त्व रखती है इसलिए इनके स्थापन के लिए उच्च स्तरीय मापदण्डों व मापन प्रक्रियाओं का समावेश अति आवश्यक हो जाता है ।

प्रकाशीय विकिरणमिति के विभिन्न मानकों की स्थापना व उनका व्यवस्थित रूप से रख-रखाव इस अनुभाग का प्रमुख उद्देश्य है । इसके अतिरिक्त उन मानकों को लगातार वैज्ञानिक व तकनीकी रूप से उन्नत करने का कार्य भी लगातार चलता रहता है । यहाँ के प्रमुख कार्यों में प्रकाशीय विकिरण मानकों की एक आधारभूत इकाई “केंडला (candela)” की स्थापना, रख-रखाव, व उन्नत करने की प्रक्रिया सर्वोपरि है । इसके अलावा दूसरे महत्त्वपूर्ण फोटोमेट्रिक मापदण्डों (photometric parameters) जैसे लुमिनस फ्लक्स (luminous flux), इल्लुमिनेंस (illuminance), लुमिनेन्स (luminance), लुमिनस ईंटेंसिटी(luminous intensity), डिटेक्टर रेस्पोंसिविटी (detector responsivity), ताप रंग (colour temperature) तथा रेडियोमेट्रिक मापदण्डों (radiometric parameters) जैसे स्पेक्ट्रल रेडिएन्स (spectral radiance) एवम स्पेक्ट्रल इररेडिएन्स (spectral irradiance) का मापन किया जाता है ।

2. अंशांकन क्षमताएँ:

फोटोमेट्रिक, रेडियोमेट्रिक एवम कोलोरिमेट्रिक मापन

मापदंड सीमाएं कवरेज फक्टर k = 2 पर मापन मे अनिश्चितता
लुमिनस ईंटेंसीटी 1 cd to 10 3 cd 0.016 – 0.014
लुमिनस फ्लक्स 1 lm to 2×10 4 lm 0.02 – 0.018
इल्लुमिनेंस 1 lx to 5×10 3 lx 0.016 – 0.02
लुमिनेन्से 1 cd/m 2 to 10 4 cd/m 2 0.016 – 0.
ताप वितरण ( Temperature distribution) 1800 K to 3400 K 6 K to 10 K
परस्पर संबन्धित ताप रंग ( Correlated color temperature) 1800 K to 7000 K 20 K
रंग निर्देशांक ( colour coordinates)   0.002 यूनिट्स
स्पेक्ट्रल रेडिएन्स तरंगदैर्ध्य
350 nm to 400 nm
400 nm to 800 nm
800 nm to 2500 nm
0.04 – 0.02
0.020
0.03 – 0.05
स्पेक्ट्रल ईरेडिएन्स तरंगदैर्ध्य
350 nm to 400 nm
400 nm to 800 nm
800 nm to 2500 nm
0.06 – 0.026
0.026
0.026 – 0.06

स्पेक्ट्रोस्कोपिक ( Spectroscopic )मापन

एफ.टी.आइ.आर. ( FTIR)    
एन.आइ.आर. ( NIR)    
वर्णक्रम पारदर्शिता ( Spectral transmittance) 192 nm to 900 nm 0.01 – 0.045
वर्णक्रम अवशोषण( Spectral absorbance) 192 nm to 900 nm  

3. उपलब्ध सुविधाएं

प्रकाशीय विकिरण के मापन के लिए इस अनुभाग में विभिन्न प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध है, जैसे परिवर्तनशील ताप कृष्णिका (variable temperature blackbody), गोनिओ-फोटोमीटर (gonio-photometer), एफ.टी.एन.आई.आर. (FTNIR) एवम आई.आर (IR) वर्णक्रममापी (spectrometer), रमन-वर्णक्रममापी, स्पेक्ट्रल ईरेडिएन्स के मापन की सुविधा, विभिन्न प्रकार के वर्णक्रममापी, परस्पर संबन्धित फोटोन मेट्रोलोजी (correlated photon metrology) के उपकरण, एल.ई.डी. (LED) तक अन्य ऊर्जा संरक्षण करने वाले प्रकाश स्रोतों के लिए मापन उपकरण व व्यवस्थाएँ उपलब्ध हैं ।

i. कृष्णिका (black-body) :- प्रकाश स्रोत आधारित प्राथमिक मानक को परिवर्तनशील ताप कृष्णिका के रूप में स्थापित किया है। इस कृष्णिका में तापमान की सीमा 1800 K से लेकर 3200 K तक है, जिसमे मापन की अनिश्चितता ± 0.2 K है । इसकी इमिसिविटी (emissivity) 0.999, तरंगदैर्ध्य की सीमा 0.2 µm - 2.5 µm, तथा इसमे विकिरण की एकरूपता (radiance uniformity) - 0.1% है । स्पेक्ट्रल रेडिएन्स के मापन में मापन की अनिश्चितता (measurement uncertainty) तरंगदैर्ध्य की सीमा 0.2 µm - 0.4 µm मे 4% - 2% तथा 0.4 µm - 2.5 µm मे 2% से 6% पाई गई है । चित्र 1. मे इस सुविधा को दर्शाया गया है ।

चित्र 1. कृष्णिका मापन की सुविधा

ii. लुमिनस ईंटेंसीटी, इल्लुमिनेंस तथा इल्लुमिनेंस रेस्पोंसिविटी :- इन मापदण्डों के मापन के लिए 3.0 m लंबी ऑप्टिकल बेंच (optical bench) का उपयोग किया जाता है (चित्र 2.) । चित्र 2(a) में ऑप्टिकल बेंच तथा चित्र 2(b) व चित्र 2(c) में क्रमशः मानक प्रकाश स्रोत तथा मानक संसूचक (detector) व मापक (meter) को दर्शाया गया है । लुमिनस ईंटेंसीटी के निर्देशक पैमाने (reference scale) के रूप में बहुत ही उन्नत श्रेणी के टंगस्टेन फ़िलामेंट लेंप (tungsten filament lamp) का उपयोग किया जाता है । इस प्रकार के प्रकाशीय स्रोत उत्पादन दोषों से मुक्त होते हैं तथा प्रकाशीय व वैद्युतीय प्रक्रिया में लंबे समय तक उच्च श्रेणी की स्थिरता प्रदर्शित करते हैं । राष्ट्रिय भौतिक प्रयोगशाला में लुमिनस ईंटेंसीटी के निर्देशक पैमाने को परस्पर संबन्धित ताप रंग (correlated colour temperature) 2856 K व 2800 K के स्तर पर रखा जाता है । अंतरराष्ट्रीय सुसंगतता (international compatibility) बनाए रखने के लिए मानकों का समय-समय पर अंशांकन करवा लिया जाता है या फिर अंतरराष्ट्रीय आपसी-तुलना (international inter-comparison) के माध्यम से मापन में तुल्यता (equivalence) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यवस्थित किया जाता है । इस प्रकार से अंशांकित प्रकाश-मापक (photometer) उच्च श्रेणी के संसूचक के साथ प्रयोग में लाए जाते हैं जो की V ( λ ) संशोधित होते हैं तथा जिनका रेस्पोंसिविटी (f' ~ 0.5 %) सी.आइ.ई. (CIE) के लुमिनस एफीकेसी फंक्शन के लगभग बराबर होती है ।

चित्र 2. लुमिनस ईंटेंसीटी, इल्लुमिनेंस तथा इल्लुमिनेंस रेस्पोंसिविटी मापन की व्यवस्था

iii. लुमिनस फ्लक्स का अंशांकन :- पूर्ण लुमिनस फ्लक्स (absolute luminous flux) का मापन करने के लिए गोनिओ-फोटोमीटर का प्रयोग किया जाता है (चित्र 3(a))। इस स्वचालित यंत्र का प्रयोग विभिन्न प्रकार के प्रकाश स्रोतों के कार्यवाहक मानकों (working standards) को तैयार करने में किया जाता है । इन कार्यवाहक मानकों का उपयोग करके विभिन्न उद्योगों व प्रतिष्ठानों के प्राप्त प्रकाश स्रोतों का अंशांकन किया जाता है । रोज-मर्रा के अंशांकनों के लिए 3.0 m (चित्र 3(b)) व 1.0 m (चित्र 3(c)) व्यास के इंटीग्रटिंग स्फेयर (integrating sphere) उपयोग में लाये जाते हैं । अंतराष्ट्रीय सुसंगतता (international compatibility) बनाए रखने के लिए लुमिनस फ्लक्स मानकों (जैसे पोलेरोन लेंप 110 V, 200 W) का समय-समय पर अंशांकन करवा लिया जाता है । इसके अलावा समय-समय पर अंतराष्ट्रीय आपसी-तुलना में भी भाग लिया जाता है ।


चित्र 3. लुमिनस फ्लक्स मापक यंत्र

iv. ताप रंग (colour temperature) एवम रंग निर्देशांकों (colour coordinates) का मापन :- इन मापदण्डों के मापन के लिए उन्नत प्रकार के मानक (प्रकाश स्रोत रंगमापी) व पैमाने प्रयोग में लाए जाते हैं । इस कार्य में प्रयुक्त होने वाले प्रकाश स्रोत भी उत्पादन दोषों से मुक्त होते है तथा प्रकाशीय व वैद्युतीय प्रक्रिया में लंबे समय तक उच्च श्रेणी की स्थिरता प्रदर्शित करते हैं । इंकेंडेसेंट (incandescent) प्रकाश स्रोतों का ताप रंग का अंशांकन दृश्य प्रकाश वर्णक्रम (visible light spectrum) में उपस्थित लाल व नीले रंग के अनुपात की तुलना करके करते हैं, इस कार्य के लिए ऑप्टिकल बेंच का प्रयोग किया जाता है । यह तुलना मानक व नमूने (test lamp) दोनों के लिए की जाती हैं तथा उपरोक्त मापदण्डों को सीधे ही मानक रंगमापी (standard colorimeter और tristimulas colorimeter) से माप लिया जाता है । यह मापन व्यवस्था चित्र 4 (a) में दर्शाई गई हैं वही चित्र 4(b) में रंगमापीका संसूचक भी दिखाया गया है ।


चित्र 4. ताप रंग एवम रंग निर्देशांकों की मापन व्यवस्था

v. लुमिनेन्स मापन :- लुमिनेन्स का मापन प्राथमिक (ab-initio) पद्धति से किया जाता है । लुमिनेन्स के पैमाने के तौर पर जिस प्रकाश स्रोत का प्रयोग होता है उसे पहले रा.भौ.प्र. के मानक का प्रयोग करके सम्पूर्ण लुमिनस फ्लक्स के लिए अंशांकित कर लिया जाता है । इस लुमिनस फ्लक्स को एक V ( λ ) युक्तसिलिकोन फोटोडायोड वाले प्रकाशमापी से मापा जाता है । लुमिनेन्स मीटर को इस लुमिनेन्स मानक की सहायता से अंशांकित कर लिया जाता है । ज़्यादातर अंशांकनों मे एल.एम.टी. के लुमिनेन्स मानकों का प्रयोग होता है । लुमिनेन्स को गैर-चयनात्मक (non-selective) बनाने के लिए न्यूट्रैल डैन्सिटि फिल्टर्स का उपयोग किया जाता है । लुमिनेन्स मापन की व्यवस्था चित्र 5 में दर्शाई गई है ।


चित्र 5. लुमिनेन्स मापन की व्यवस्था

2. अनुसंधान

(अ). स्पेक्ट्रल स्विचिंग, फ्री-स्पेस ओपटिक्स (एफ.एस.ओ.) एवम एफ.एस.ओ. कम्युनिकेशन – डॉ. भरत कुमार यादव तथा डॉ. हेम चन्द्र काण्डपाल

स्पेक्ट्रल स्विचिंग प्रकाश विवर्तन (diffraction) के कारण उत्पन प्रकाशीय घटना है जिसका न केवल सैद्धांतिक बल्कि प्रयोगिक रूप से भी अच्छी तरह से अध्ययन व विश्लेषण किया गया है और अब ये सर्वविदित घटना हो चुकी है । स्पेक्ट्रल स्विचिंग का उपयोग कई क्षेत्रों >में किया जा सकता है जैसे एफ.एस.ओ. कम्युनिकेशन,एफ.एस.ओ. इंटर कनेक्ट्स, स्पेक्ट्रम सेलेक्टिव ऑप्टिकल कनेक्ट्स आदि । हालांकि स्पेक्ट्रल स्विचिंग का प्रयोग एफ.एस.ओ. कम्युनिकेशन के क्षेत्र में काफी नया है पर निकट भविष्य में इसका व्यापक प्रयोग होने की पूर्ण संभावना है । हाल ही में यह पाया गया है कि स्पेक्ट्रल स्विचिंग का प्रयोग सूचनाओं के आदान-प्रदान में भी किया जा सकता है । यह दर्शाया जा चुका है कि यदि सूचना की छोटी इकाई बिट्स ‘1‘ तथा ‘0‘ को वर्णक्रम के रेड-शिफ्ट तथा ब्लू-शिफ्ट के साथ संयुक्त कर पाएँ तो स्पेक्ट्रल स्विचिंग के प्रयोग से सूचना संकेतिकरण ( encoding) संभव है । स्पेक्ट्रल स्विचिंग को विभिन प्रकार की सूचना संकेतिकरण की विधाओं में प्रयुक्त किया जा सकता है जेसे फ्रिक्वेंसि-शिफ्ट-किईंग ( FSK ) तथा ऑन-आफ किईंग ( OOK ) । इस प्रकार से किया जाने वाला सूचना संकेतिकरण, एफ.एस.ओ. कम्युनिकेशन में बड़ा उपयोगी साबित हो सकता है ।

प्रकाश की एक विशिष्ट प्रकार की किरण जिसे डार्क होलो गौशियन बीम ( DHGB) भी कहते हैं का प्रयोगिक रूप से अध्ययन किया है (चित्र 6.) । डार्क होलो गाशियन बीम का उपयोग एफ.एस.ओ. कम्युनिकेशन में विशेष तौर पर किया जा सकता है । इस कार्य पर एक शोध पत्र (“ स्पेक्ट्रल अनोमालिज़ ऑफ पोलीक्रोमेटिक डीएचजीबी एंड इट्स अप्लीकेशन्स इन एफएसओ ,” जनरल आफ लाइटवेव टेक्नालजी, वॉल. 29, पेज सं। 960-966 (2011) प्रकाशित हो चुका है ।

प्रयोग व्यवस्था

डार्क होलो गौशियन बीम

चित्र 6. डार्क होलो गौशियन बीम के लिए प्रयुक व्यवस्था

ट्यूमर निदान (tumour diagnosis) के लिए इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपीक अध्ययन – डॉ. रंजना महरोत्रा

मैलिग्नैन्ट ब्रेस्ट टिस्सूज ( malignant breast tissues) का इंफ्रारेड स्पेक्ट्रा 600 cm -1 से लेकर 4000 cm -1 तक मापा जाता है । मापे गए स्पेक्ट्रोस्कोपिक लक्षण जो कि टिस्सूज के स्पेक्ट्रोस्कोपिक फिंगरप्रिंट कहे जा सकते हैं, अपने साथ मैलिग्नैन्ट तथा सामान्य टिस्सूज की बहुत सारी सूचनाएँ समेटे होते है । इस अध्ययन की नवीन बात यह है कि इन सूचनाओं के आधार पर हम मैलिग्नैन्ट टिस्सूज तथा सामान्य टिस्सूज को विभेदित किया का सकता है । हमने 25 विभिन्न मामलों का इस संदर्भ में एफ.टी.आइ.आर. से प्राप्त तथ्यों का अध्ययन किया । ये नमूने विभिन्न आयु वर्ग के व्यक्तियों से लिए गए तथा इनमें मैलिग्नैन्ट कि मात्रा भी भिन्न थी । इंफ्रारेड स्पेक्ट्रा ने इन आंकड़ों मे महत्वपूर्ण वर्णक्रम विविधता दर्शाई जिनके आधार पर मैलिग्नैन्ट टिस्सूज तथा सामान्य टिस्सूज को विभेदित किया जा सकता है । यह पाया गया कि मैलिग्नैन्ट टिस्सूज में विशेष रूप से आव्रति (frequency) तथा तीव्रता ( intensity) में परिवर्तन पाये जाते हैं, यह परिवर्तन प्रोटीन, न्यूक्लिक एसिड में तथा लिपिड/प्रोटीन, प्रोटीन/ न्यूक्लिक एसिड, प्रोटीन/ ग्लिकोजन ( glycogen) के अनुपात, ग्लिकोजन वाइब्राशनल मोड व ईंटेंसिटी में देखा गया है । ये आंकड़े हमें सामान्य टिस्सूज से मैलिग्नैन्ट टिस्सूज में बदलने कि प्रक्रिया का गुणवत्ता आधारित विश्लेषण प्रदान कर सकते हैं ।

स्विचिंग लाइट विथ लाइट (switching light with light) – डॉ. पराग शर्मा

रोड़ोप्सिन (rhodopsin) में लेजर से प्ररित (laser induced) नॉन-लिनियर अवशोषण प्रक्रिया का सैद्धांतिक अध्ययन किया गया । ये परिणाम इन प्रोटीन के अणुओं में सरल पम्प-प्रोब जामिति के प्रयोग से आल-ऑप्टिकल स्विचिंग का संचालन संभव बनाते हुए “ स्विचिंग लाइट विद लाइट” कि संभावना को मान्य करते है । यहाँ स्विचिंग कि गति मिलिसेकंड से लेकर माइक्रोसेकंड तक प्राप्त कि जा सकती है । अणुओं कि सघनता को बढ़ा कर इस प्रकार की स्विचिंग की क्षमता को और भी बढाया जा सकता है ।

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